गर्भवती व शिशुओं को संतुलित आहार देना जरूरी

सुपोषण स्वास्थ्य मेला में कुपोषण से बचाव की दी गई जानकारी


स्वास्थ्य उपकेंद्र तिगाई में आयोजित हुआ सुपोषण स्वास्थ्य मेला


कानपुर देहात(अमर स्तम्भ)। 4 मार्च को कुपोषण को मात देने के लिए ब्लॉक अकबरपुर गांव  तिगाई के उपकेन्द्र   में सुपोषण स्वास्थ्य मेला का आयोजन किया गया | मेले में गर्भवती महिलाओं के खून, पेशाब एवं ब्लड प्रेशर की जांच की गयी। इसके अलावा पोषण परामर्श एवं टिटनेस के टीके लगाने के साथ-साथ आयरन फोलिक एसिड और कैल्शियम की गोलियां प्रदान की गई । इस दौरान गर्भवती महिलाओं का एमसीटीएस (मदर चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम) पर रजिस्ट्रेशन किया गया, प्रधानमंत्री मातृ  वंदना योजना से होने वाले लाभ की जानकारी दी गई। इसके साथ शून्य  से दो वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण भी किया गया, मेले में आईं धात्री माताओं द्वारा  अपने बच्चे के लिए पूरक आहार तैयार करने की विधि का प्रदर्शन किया गया। स्कूल न जाने वाली किशोरियों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से आयरन की गोलियां प्रदान की गई और , व्यक्तिगत और पर्यावरणीय स्वच्छता के साथ-साथ माहवारी के दौरान बरती जाने वाली स्वच्छता की जानकारी दी गई। बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए स्वच्छ पेयजल और शौचालय के प्रयोग हेतु प्रोत्साहन दिया गया, अकबरपुर ब्लॉक की सुपरवाइजर पुष्पा सचान ने कहा कि कुपोषण हमारे विकासशील समाज का कलंक है, जिससे साबित होता है कि हम अपनी भावी पीढ़ी के प्रति कितने असंवेदनशील हैं, क्योंकि पता नहीं कि कितनी प्रतिभाएँ कुपोषण की वजह से हमारे राष्ट्र के विकास में अपना योगदान नहीं दे पातीं।
साथ ही कहा -  आज एनीमिया हमारे देश की एक बहुत बड़ी समस्या बनकर सामने आई है, इसको दूर करने के लिए हरी सब्जियों, पोषक खाद्य पदार्थों और सरकार द्वारा दी जाने वाली आयरन की गोलियों का भी सेवन करना होगा,
उपकेन्द्र की एएनएम  अर्चना ने इस अवसर पर मौजूद गर्भवती को प्रधानमंत्री मातृ  वंदना योजना, सुमंगला योजना,  और टीकाकरण के बारे में बताया। उन्होने बताया-  इस योजना के अंतर्गत उपकेंद्र पर पंजीकरण कराने वाली और नियमित टीके तथा जांच पूर्ण कराने वाली गर्भवती को सरकार द्वारा तीन किश्तों मेँ पाँच  हजार रुपये उनके खाते में भुगतान किए जाते हैं, तिगाई गाँव की 27 वर्षीय गर्भवती महिला सुधा  कहती हैं कि इस तरह के मेले से हमें अपने और अपने होने वाले बच्चे के लिए क्या उचित रहेगा जानकारी मिल जाती है, इसी गाँव  की 26 वर्षीय रेशमा कहती हैं कि हमें इस तरह के मेले से पता चलता है कि अपने बच्चे को सिर्फ माँ का ही दूध पिलाना चाहिए ऊपर का कुछ भी नहीं |माँ के दूध में ही सभी पौष्टिक आहार होते हैं, मेले के दौरान  ए एन एम अर्चना, आशा अनीता बानो गीता सीमा शशि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, गर्भवती और धात्री महिलाएं आदि मौजूद रहीं।